जबलपुर लोकायुक्त ने ऑपरेशन के लिए.. 10 हजार की रिश्वत मांगने वाले जिला अस्पताल के सर्जन को.. निजी अस्पताल में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा.. कारवाई की खबर से सरकारी चिकित्सकों में हड़कंप..

 
 हर्निया ऑपरेशन के लिए रिश्वत  ले रहे सर्जन को पकड़ा
जबलपुर/  मण्डला ।  रकारी नौकरी करते हुए निजी क्लीनिक में आपरेशन के नाम पर मरीजों के परिजनों ने मोटी रकम बसूलने वाले डाक्टरों के लिए यह बुरी खबर है। लोकायुक्त ने अब ऐसे डाक्टरो ंपर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है जो शासकीय चिकित्सक होने के बावजूद सरकारी अस्पताल में इलाज करने के बजाए अपनी निजी क्लिनिक में मरीजों को भेजने को मजबूर करते है तथा इलाज व आपरेशन के नाम पर मरीजों से रूपयों की मांग करते है। लोकयुक्त टीम ने मण्डला जिला अस्पताल के एक सर्जन को एक मरीज के हर्निया ऑपरेशन के बदले में 10 हजार की रिश्वत मांगने की शिकायत के बाद कार्यवाही करते हुए रंगे हाथों पकड़ने के बाद भ्रष्टाचार अधिनियम की वि भिन्न धाराओं के तहत कार्यवाही की है।
जबलपुर लोकायुक्त ने ऑपरेशन के लिए.. 10 हजार की रिश्वत मांगने वाले जिला अस्पताल के सर्जन को..  निजी अस्पताल में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा.. कारवाई की खबर से सरकारी चिकित्सकों में हड़कंप..
मण्डला पहुंचकर रिश्वतखोर सर्जन को रंगे हाथों पकड़ने वाले लोकायुक्त जबलपुर के डीएसपी जेपी वर्मा ने  प्रकरण की जानकारी देते हुए बताया कि मण्डला जिले के बकोरी तहसील निवासी प्रमोद कुमार नरेती ने शिकायत की थी कि उसके पिता सोनू लाल नरेती के हर्निया आपरेशन के बदले में जिला अस्पताल के सर्जन डॉ सुनील कुमार यादव ने दस हजार रुपए की मांग की है। जिसके बाद लोकायुक्त टीम द्वारा जाल बिछाकर की गई कार्यवाही में रिश्वतखोर सर्जन को सोमवार 17 सितंबर को 6 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए निजी क्लीनिक में  रँगे हाथो दबोच लिया गया।
जबलपुर लोकायुक्त ने ऑपरेशन के लिए.. 10 हजार की रिश्वत मांगने वाले जिला अस्पताल के सर्जन को..  निजी अस्पताल में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा.. कारवाई की खबर से सरकारी चिकित्सकों में हड़कंप..
लोकायुक्त टीम की कार्यवाही के बाद डॉ सुनील यादव की रोजगार कार्यालय के पीछे रानी अवंती बाई वार्ड मंडला में क्लीनिक के बाहर लोगों की भीड़ लगी रही। हवाई कार्रवाई करने वाली टीम में उप पुलिस अधीक्षक जेपी वर्मा, निरीक्षक श्रीमती मंजू किरण तिर्की, आरक्षक अतुल श्रीवास्तव, दिनेश दुबे, शरद पांडे, विजय बिष्ट एवं आरक्षक चालक राकेश विश्वकर्मा शामिल रहे। लोकायुक्त की है कारवाही उन सरकारी रिश्वतखोर डॉक्टरों के लिए सबक साबित हो सकती है जो सरकारी अस्पताल में सेवा देने के बावजूद मरीजों से ऑपरेशन के बदले में रिश्वत लेते हैं तथा उन्हें अपने निजी क्लीनिक में आने को मजबूर करते हैं।

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