वीरांगना रानी दुर्गावती पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म, सिंगौरगढ़ किले में शीघ्र शुरू होगी शूटिंग.. इधर विद्वानों को पहचान दिलाएगी यह वेबसाइड

मुंबई से अशोक शरण की टीम ने किया भ्रमण
 
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गोंडवाना समज्ञी, वीरांगना रानी दुर्गावती के जीवन पर आधारित एक डॉक्यमेंट्री फिल्म का निर्माण शूटिंग उनकी कर्मभूमि एवं विशाल सम्राज्य कि प्राचीन राजधानी सिंगोर गढ़ के किले में शीघ्र होगी। इसी सिलसिले में मुंबई से दमोह जिले के सिंगोरगढ़ अपनी टीम के साथ भ्रमण पर आए ट्राईबल इंडिया टीवी के सी ईओ एवं केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सदस्य जर्नलिस्ट अशोक शरण ने भ्रमण किया..

केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सदस्य जर्नलिस्ट अशोक शरण ने कहां कि गोंडवाना सम्राज्य का गौरवशाली इतिहास एवं वीरांगना दुर्गावती की वीर गाथा जिसका वर्णन इतिहासकारों से सुनने मिला। मेरे मन में भी इस स्वर्णिम इतिहास को एक फिल्म के रूप में प्रदर्शत करने विचार आया और अपनी टीम के इसी भावना,उद्देश्य को लेकर आ पहुंचा इस वीर,बलिदानी कर्मस्थली सिंगोरगड़ किले में।करीब पांच सौ वर्ष पुरानी इस ऐतिहासिक वीर गाथा में वीरांगना दुर्गावती ने बहुत ही छोटी सी सेना को लेकर विशाल मुगल साम्राज्य अकबर से लौहा लिया। कई बार विशाल मुगल सेना को परास्त भी किया और अपनी आन, बान और शान की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।

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रानी दुर्गावती का जीवन संघर्ष मय रहा है किन्तु इतिहासकारों ने उनकी इस वीर गाथा को इतिहास में वह स्थान नहीं दे पाए। उन्होंने तो अकबर को महान बताया अब हम इसी गौरवशाली इतिहास को लेकर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का निर्माण करने जा रहे है, जिसकी शूटिंग सिंग्रामपुर व सिंगौरगढ़ में किया जाना है। इन स्थानों पर आज भी पुरातत्व अवशेष भी मौजूद है साथ ही उनका किला भी अच्छी हालत में उनके इतिहास की गवाही देता है। अशोक शरण के द्वारा इसीलिए इस स्थल का चयन फिल्म की शूटिंग के लिए किया गया है उनके साथ उनकी पूरी टीम भी पहुंची है जो सभी क्षेत्रों का चयन कर शूटिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। वनवासी समिति के प्रदेश पदाधिकारी अर्जुन सिंह मरकाम के प्रयासों से यह टीम यहां पहुंची है और अशोक शरण जी के नेतृत्व में डॉक्यूमेंट्री फिल्म तैयारी चल रही है। जिसकी शूटिंग शीघ्र ही प्रारम्भ की जावेगी। मयंक जैन की रिपोर्ट

विद्वानों को पहचान दिलाएगी यह वेब साइड
दमोह। भारत वर्ष के जैन विद्वानों के लिए सर्वोपयोगी वेबसाइड का निर्माण लगभग पूर्णता की ओर है जो सभी विद्वानों को एक प्लेटफार्म पर लाने के लिए कटिबद्ध है। जिसके लाभ समाज को आगामी समय में मिलेंगे। वेबसाइट  का निर्माण संस्कृत-प्राकृत तथा प्राच्य विद्या अनुसंधान केंद्र के निदेशक, युगल प्रतिष्ठाचार्य डॉ अभिषेक जैन एवं डॉ आशीष जैन शिक्षाचार्य सगरा वाले दमोह ने कराया है। इसके माध्यम से समाज की प्रतिभाओं की खोज की जावेगी । समाज के कुलपति, प्रशासनिक अधिकारियों, डॉक्टर, प्रोफेसर, जज, इंजीनियर, विधि विशेषज्ञ, भाषा विद, प्रतिष्ठाचार्य, पंडित, कवियों, साहित्यकारों , पत्रकारों, बृहद उद्योगपति, लघु उद्योगियों, भारत के जैन तीर्थ एवं जैन मंदिरों का परिचय, समाज सेवी संगठनों का परिचय आदि अनेक जानकारियां प्राप्त होगी।
समाज के अध्ययनरत विद्यार्थियों को विषय विशेषज्ञों के द्वारा विशेष परामर्श  की सुविधा प्रदान की जावेगी। संस्कृत-प्राकृत, जैन विद्या, प्राच्यविद्या, दर्शन शास्त्र, ज्योतिष शास्त्र, वास्तु शास्त्र, मनोविज्ञान, संगीत ,कला, साहित्य  एवं जैन शास्त्रों व विधि-विधान आदि अनेक विषयों का अध्ययन एक वर्षीय, दो वर्षीय पाठ्यक्रम के साथ कराया जाएगा। जैन मंदिरों एवं शैक्षणिक संस्थानों  में संचालित पाठ शालाओं को उच्च शिक्षा से जोड़कर जीवनोपयोगी कौशल प्रमाण पत्रों को प्रदान कराने की व्यवस्था की जावेगी ।
जैन तीर्थ संरक्षण से सम्बंधित इतिहास संग्रह का कार्य भी किया जावेगा। समाज के आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के योग्य छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति के लिए संपर्क सूत्र के साथ उनकी यथायोग्य आर्थिक सहायता भी की जावेगी ।*उपरोक्त समस्त सुविधाओं में अपना सहयोग प्रदान करने हेतु वेबसाइड की लिंक पर जाकर आपको अपनी प्रोफाइल बनाना होगी जिससे समाज आपकी योग्यता का उपयोग कर सके ।आप सभी निम्न वेब साईट को विजिट करे और रजिस्ट्रेशन करें । www.prachyavidhya.in  पर जाकर रजिस्ट्रेशन मेम्बर लोगिन पर अपनी जानकारी फिल करे।युगल प्रतिष्ठाचार्य डॉ. अभिषेक जैन,डॉ. आशीष जैन शिक्षाचार्य  सगरा वाले।

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