कुंडलपुर में रिमझिम बारिश में आचार्यश्री विद्यासागर जी का पडगाहन.. नगर गौरव निर्मोह सागर जी के साथ मुनिसंघ की भव्य अगवानी..

आर्यिका रत्न आदर्शमति माताजी की कुंडलपुर में अगवानी
 
aachary shri
कुंडलपुर में बड़ेबाबा मंदिर निर्माण कार्य के अंतिम चरण में पहुचने के साथ पंच कल्याण गजरथ महोत्सव को लेकर आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के सानिध्य में तैयारियां जोरो पर है। कुंडलपुर में आचार्यश्री से दीक्षित मुनिराजों एवं आर्यिका संघ के पहुचने का सिलसिला जारी है वहीं आज रिमझिम बारिश के बीच आचार्यश्री का पडगाहन करके आहार दान का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठी महेश बड़कुल परिवार को प्राप्त हुआ.

रिमझिम वारिस में हुआ आचार्य श्री का पडगाहन

दिगम्बर संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी को अनुकूल और प्रतिकूल मौसम भी प्रभावित नहीं कर पाती है, तापमान जब निरंतर गिरे या बढे, निरंतर बारिस हो लेकिन जैन संत अपने कर्तव्य पथ से विचलित नहीं होते। वैराग्य के मार्ग पर अनेक बाधाओं का आना स्वाभाविक, इन बाधाओं को लांघ कर निरंतर आगे बढे वही सच्चा संत है। ऐसा ही कुछ आज सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ कुण्डलपुर में देखने को मिला, जहां ठंड से दांत भी कांप रहे थे, वही रिमझिम बारिस सभी को कमरे के अंदर दुबकने को मजबूर कर रही थी। इसी रिमझिम बरसात के दौरान जब आहारचर्या का समय हुआ तो लोग कहने लगे ऐसे में कैसे पडगाहन होगा, तभी मंदिर प्रांगण से घंटी की आवाज आई और आचार्य श्री के साथ सारे मुनिश्री आहार के लिए निकल पडे, पूरे क्षेत्र में नमोस्तु नमोस्तु के स्वर गूंजने लगे, भक्त भी इस बरसात में पीछे नहीं हटे।

28 पिच्छी सहित आर्यिका संघ का कुण्डलपुर में प्रवेश

आहार उपरांत हटा विधायक पीएल तंतुवाय, दीपक सेठ, सामाजिक सरोकार समिति के हटा प्रभारी हरिराम पांडे, कमलेश गौतम, जितेन्द्र प्यासी, अजीत अवस्थी, सुरेन्द्र उपाध्याय, हटा आवास समिति प्रभारी संजय जैन ने आचार्यश्री को श्रीफल भेंट कर मंगलाशीष लिया, विधायक ने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि हमारे कार्यकाल में,हमारे क्षेत्र में इतना बडा आयोजन हो रहा है हमें मेजबानी का सौभाग्य मिल रहा है। यहां आने वाले हर श्रद्धालुओ का स्वागत अभिनंदन अतिथि देवो भवः की परम्परानुसार किया जायेगा। ललितपुर से मंगल विहार करते हुए आर्यिका रत्न श्री आदर्शमति माता जी 28 पिछियों को साथ दोपहर में बडे बाबा के आंगन में पहुंची, जहां आर्यिका संघ की भव्य अगवानी दिव्यघोष के साथ हुई, आर्यिका संघ के साथ ललितपुर उतरप्रदेश से करीब दो हजार यात्री भी आये हुए है।


निर्मोह सागर जी के साथ मुनि संघ की अगवानी..


संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री संभव सागर जी महाराज का एकलव्य विश्विद्यालय टोल प्लाजा सागर रोड से सुबह पद विहार हुआ सैकड़ों भक्त मुनि श्री के पद विहार में सम्मिलित हुए। सकल जैन समाज और बालिका मंडल ने सागर नाका पहुंच कर मुनि संघ सहित नगर गौरव मुनि श्री निर्मोह सागर जी महाराज की आरती कर भव्य अगवानी की, बेमौसम बरसात में भीगते हुए भक्त मुनि संघ को बारिश से बचाने छाते  लिए खुद भीगते हुए चल रहे थे। सदगुवा जैन मंदिर के पास मुनि श्री विरंजन सागर ने मुनि संघ की अगवानी की और साथ में तीन गुल्ली, स्टेशन चौराहा, राय तिराहा, घंटाघर ,उमा मिस्त्री की तलैया 2होते हुए नन्हें मंदिर जैन धर्मशाला तक पहुंच कर जिनेन्द्र भगवान के दर्शन किए।

नगर गौरव मुनि श्री निर्मोह सागर जी ने सन्देश देते हुए कहा कि अब मेरा दमोह से मोह छूट गया है और आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने मुझे निर्मोह बना दिया है, आपने यही के स्थानीय जैन मंदिर में अपने योगदान को याद किया और सभी को आशीर्वाद दिया। मुनी श्री संभव सागर जी को आहार देने का सौभाग्य राजेश जैन हिनोती को प्राप्त हुआ। नगर गौरव मुनि श्री को आहार देने का सौभाग्य सौरभ लहरी और परिवारजनों को प्राप्त हुआ। कुण्डलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को आहार देने का सौभाग्य महेश बड़कुल दमोह और डॉ.संजीव सिंघई दमोह, डॉ.संदीप सिंघई, श्रीमति कुसुम सिंघईं, राजीव सिंघई पाटन के परिजनों को प्राप्त हुआ।

धर्म ध्यान रूपी श्रम करने से मन के भाव शुद्ध होते है- आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
दमोह
। सिद्ध क्षेत्र कुण्डलपुर में विराजमान संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन के माध्यम से भक्तों को इष्ट वियोग और अनिष्ट संयोग के विषय पर सार्थक ज्ञान दिया। इष्ट को अपने लिए अनुकूल पर अनिष्ट संयोग जो इष्ट नहीं था उसे मान लेते है। अनेक प्रकार के जो भाव पैदा होते  हैं वो हमारी कमजोरी का प्रमाण हैं,इसको दूर करने के लिए आचार्य श्री ने आत्म ध्यान करने की बात कही। दोनों परिस्थिति में ज्ञानी लोग न ही इष्ट का स्वागत करते हैं और न ही अनिष्ट का बहिष्कार करते हैं, यह सब हमारी भावनाओं का परीणाम है, जैसे औषधि से रोग ठीक हो जाता है पर कमजोरी जल्दी नहीं जाती जिसका एक अच्छा उपाय है कि श्रम करो जिससे भूख लगने लगेगी। इसी तरह धर्म ध्यान रूपी कसरत करते रहने की सलाह दी। समता ध्यान रखना चाहिए और उत्साह का विकास होना चाहिए आजकल जनता के पास उत्साह कम और उत्सुकता ज्यादा होती है जो गति को रोकने वाली वस्तु है जबकि उत्साह और रूचि हो तो उत्प्रेरक का काम करते हैं।

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