मप्र में पंचायत चुनाव निरस्त होने के साथ आचार सहिंता हटी.. जमानत राशि होगी वापिस, हजारों के बकाया बिल जमा कराने वाले टेंशन में

राज्य निर्वाचन आयोग ने किए पंचायत चुनाव निरस्त
 
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भोपाल। मप्र में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के मुद्दे को लेकर उलझी पंचायत चुनाव की गुत्थी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद भी नहीं सुलझ सकी और आखिरकार मध्य प्रदेश निर्वाचन आयोग चुनाव निरस्त करने की घोषणा करना पड़ी है। इसी के साथ जिन प्रत्याशियों ने चुनाव नामांकन जमा किए थे उनकी जमानत राशि वापस करने के भी निर्देश दिए गए हैं। लेकिन उपरोक्त निर्णय के बाद अनेक दावेदार अपने आप को ठगा सा महसूस छुपा रहे हैं क्योंकि उन्होंने पंचायत चुनाव लड़ने के चक्कर में अपने पुराने हजारों के बकाया बिजली बिल आदि जमा कराने से लेकर प्रचार सामग्री तैयार का नाम पर कराने पर भी हजारों रुपए खर्च कर दिए हैं..

मध्यप्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव निरस्त कर दिए गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने 4 दिसंबर 2021 द्वारा घोषित किया गया चुनाव कार्यक्रम निरस्त कर दिया गया है।इससे पहलेे मध्य प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग में बैठक हुई। अध्यादेश को वापस लिए जाने के बाद राज्य चुनाव आयोग ने कानूनी स्थिति को लेकर आज विधि विशेषज्ञों के साथ बैठक की। आयोग के सचिव बीएस जमोद का कहना था कि चुनाव को लेकर कोई भी फैसला कानूनी राय लेने के बाद ही लिया जाएगा सोमवार को राज्य चुनाव आयोग में दिन भर बैठकों का दौर चलता रहा चुनाव आयुक्त ने करीब डेढ़ घंटे तक प्रधान सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग उमाकांत उमराव, निदेशक पंचायत राज आलोक कुमार सिंह और आयोग के अधिकारियों के साथ बैठक की। आज देर शाम चुनाव कार्यक्रम निरस्त कर दिया गया

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शिवराज सरकार द्वारा मध्य प्रदेश पंचायत राज और ग्राम स्वराज संशोधन अध्यादेश को वापस लिए जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव सोमवार को स्थगित या रद्द कर दिया जाएगा, लेकिन देर शाम तक फैसला नहीं हो सका था। उधर, राज्य चुनाव आयुक्त बसंत प्रताप सिंह ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास के साथ आयोग के अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी पहलुओं पर चर्चा की। इसके बाद विधि विशेषज्ञों की राय लेने का निर्णय लिया गया था।

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