मप्र का कर्मचारी आर्थिक एवं मानसिक रूप से परेशान, शासन् कुंभकर्णी निद्रा में.. लिपिक वर्गीय संघ प्रान्ताध्यक्ष का शंखनाद

शासन् कर्मचारीयों के प्रति कोई ध्यान नहीं दे रहा
 
lipik sangh
मप्र लिपिकीय वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के प्रान्ताध्यक्ष राकेश सिंह हजारी द्वारा प्रदेश शासन् पर स्पष्ट रूप से कहा है कि शासन् कर्मचारीयों के प्रति कोई ध्यान नहीं दे रहा है जिसके कारण कर्मचारी मानसिक एवं आर्थिक रूप से परेशानीयों से गुजर रहा हैए पूर्व वर्षो में कर्मचारियों को दीपावली पर्व पर बोनस दिया जाता था उसको भी तत्कालीन शासन् द्वारा इसे बंद कर दिया गया
 प्रदेश के कर्मचारियों को उनके सेवानिवृत्ती पर पेंशन योजना का लाभ प्राप्त था उसे भी बंद कर दिया गया कर्मचारियों का अवकाश नगदीकरण योजना थी उसे भी बंद कर दिया गया ऐसे अन्य आर्थिक लाभों से प्रदेश का कर्मचारी वंचित हो चुका है। इसके बाद अभी वर्ष 2019 में कोरोना का सहारा लेकर प्रदेश के कर्मचारियों का मंहगाई भत्ता रोका गया इसके बाद वेतन वृद्धि रोकी गई। महंगाई चरम सीमा पर पहुंच गई है इस दौरान सभी समाजों के महत्वपूर्ण त्यौहार भी आये किन्तु मंहगाई के कारण सभी त्यौहारों का आनंद नहीं ले पाये। शासन् ने अपने कर्मचारियों पर मंहगाई के ओर किसी भी प्रकार का ध्यान नहीं दिया ऐसे में कर्मचारियों की मानसिक स्थिति भी खराब हो गई। वर्तमान में शासन् को सोलह प्रतिशत मंहगाई भत्ता दिया जाना था किन्तु मात्र आठ प्रतिशत मंहगाई भत्ता की किश्त जारी की गई वह भी अक्टूबर 2021 का वेतन भुगतान जो माह नवम्बर 2021 में किया जाना है इसके पहले का मंहगाई भत्ता के एरियर्स का भुगतान के संबंध में कोई निर्देश जारी नहीं किये गये। कर्मचारियों को आस थी कि शासन् दीपावली पर्व पर मंहगाई भत्ता एवं वेतनवृद्धि का लंबित भुगतान की घोषणा करेंगा किन्तु शासन् अपनी कुंभकर्णी निद्रा में होने से कर्मचारियों की आस भी विफल रहीं।

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 शासन् द्वारा कोरोना का हवाला देकर कार्यालयीन समय प्रातः 10.00 बजे से शाम 6.00 बजे तक सोमवार से शुक्रवार किया गया यह भी कर्मचारीयों को मानसिक रूप से परेशान करने वाला साबित हो रहा है। अभी भी प्रत्येक शनिवार रविवार को कर्मचारियों को अवकाश का लाभ प्राप्त नहीं हो रहा है इन दो दिवसों में शासन् स्तर की वीडियों कान्फ्रेस जिला स्तर की मीटिंगे मंत्रीयों का दौरा कार्यक्रम आदि रखे जाते है जिस कारण कर्मचारियों को इन अवकाशों का लाभ प्राप्त नहीं हो पा रहा है। शासन् अपने कर्मचारियों पर ध्यान ना देकर अन्य ऐसे कई उदाहरण है जिसमें किसी प्रकार का कोरोना या अन्य मदों का सहारा ना लेकर कार्यक्रम आयोजित किये जाते है जिसमें करोड़ों रूपया खर्च किये जा रहे है किन्तु कर्मचारियो को उनके जायज आर्थिक लाभ नहीं दिया जा रहा है, पूर्व में केन्द्र के समान आर्थिक लाभ दिये जाने का समझौता है कि जब भी केन्द्र सरकार अपने कर्मचारियों का मंहगाई भत्ता की किश्त जारी करेगा प्रदेश शासन् अपने कर्मचारियों को जस का तस जारी करेंगा किन्तु इस पर भी प्रदेश शासन् खरी नहीं उतरी दूसरी तरफ हमारा सेवा निवृत्त कर्मचारियों भी इन्हीं समस्याओं से गुजर रहा है। सेवानिवृत्ती के बाद परिवार को चलाने के लिये मात्र पेंशन मिलती थी उस पर दिया जाने वाला मंहगाई भत्ता भी नहीं दिया जाना यह न्यायसंगत नहीं है । कुछ कर्मचारी संगठन मात्र अपने स्वार्थ के कारण प्रदेश के कर्मचारियों के साथ न्याय ना करते हुये शासन् के साथ उन्हें बधाई देते है यह कर्मचारियों के साथ धोखा करना है ।

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