प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के भोपाल आगमन के पूर्व.. हबीबगंज स्टेशन के पटल पर चस्पा हुआ रानी कमलापति का नाम..

 हबीबगंज स्टेशन हुआ रानी कमलापति के नाम
 
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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के भोपाल आगमन के पूर्व हबीबगंज रेलवे स्टेशन के पटल पर रानी कमलापति का नाम चस्पा करने का कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है कल प्रदेश सरकार द्वारा तदसंदर्भ में रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेजा था जिसकी आज मंजूरी मिल जाने के बाद राजपत्र में भी इसका प्रकाशन हो गया है। इसी के साथ भोपाल से इटारसी मार्ग के हबीबगंज नाम के स्टेशन का नाम अब सिर्फ पुराने रिकॉर्ड में ही रह गया है..

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भोपाल। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के भोपाल आगमन के पूर्व हबीबगंज रेलवे स्टेशन के पटल पर रानी कमलापति का नाम चस्पा करने का कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है कल प्रदेश सरकार द्वारा तदसंदर्भ में रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेजा था जिसकी आज मंजूरी मिल जाने के बाद राजपत्र में भी इसका प्रकाशन हो गया है। इसी के साथ भोपाल से इटारसी मार्ग के हबीबगंज नाम के स्टेशन का नाम अब सिर्फ पुराने रिकॉर्ड में ही रह गया है आज से स्टेशन पर लगे बोर्ड होर्डिंग मैं रानी कमलापति चस्पा किए जाने का कार्य तेजी से किया जाता रहा उल्लेखनीय है कि भोपाल की अंतिम गौड़ शासक रही रानी कमलापति के अनेक किले बावड़ी सहित अन्य धरोहर भोपाल तथा आसपास के क्षेत्र में आज भी गौड़ शासन की ऐतिहासिकता का प्रमाण समेटे हुए हैं।

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रानी कमलापति मतलब भोजपाल का गौरव.. रानी कमलापति भोपाल की अंतिम गोंड शासक थीं। उनके पति की उनके नजदीकी रिश्तेदारों ने जहर देकर हत्या कर दी थी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 15 नवंबर को भोपाल में आयोजित जनजाति सम्मेलन मैं शामिल होने आ रहे हैं इस  अवसर पर वह 100 करोड़ की लागत से फिर से तैयार हुए हबीबगंज रेलवे स्टेशन का रानी कमलापति स्टेशन के नाम से लोकार्पण करने के साथ रेलवे से संबंधित अन्य सौगातो भी देंगे। स्टेशन नामकरण के साथ चर्चाओं में आई रानी कमलापति के बारे में सोशल मीडिया पर वायरल हो रही जानकारी के अनुसार उन्होंने अपने पति के हत्यारों से बदला लेने के लिए अफगानिस्तान से आए मोहम्मद खान की मदद ली थी। रानी कमलापति के पति के हत्यारों की हत्या करने के बाद दोस्त मोहम्मद खां ने उनसे दगा करते हुए भोपाल रियासत पर कब्जा कर लिया था। 

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भोपाल में बड़े तालाब पर जो डैम बना हुआ है जिसे कमला पार्क कहते है और जो बड़े व छोटे तालाब को विभाजित करता है वह रानी कमलापति के कुशल वास्तु और इंजीनियरिंग का एक बेहतर नमूना है। भोपाल में जो तमाम महल किले कुएं तालाब और वाबडियां नजर आती हैं वह गोंड राजाओं की देन है ना कि नवाबों की। ऐसे में अब हबीबगंज स्टेशन का नाम रानी कमलापति के नाम पर किए जाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भोपाल को भोपाल का गौरव वापस करने के लिए बधाई देने का दौर भी सोशल मीडिया पर लगातार चल रहा है..

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