रिश्वतखोर वनपाल को कोर्ट ने सुनाई 4 साल की सजा
दमोह। न्यायालय विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम दमोह संतोष कुमार गुप्ता आरोपित राधे श्याम श्रीवास्तव, (वनपाल) वन परिक्षेत्र सगौनी, वृत्त नोहटा जिला दमोह, उम्र 53 वर्ष, निवासी इंद्रमोहन नगर डॉ मनीष पटेल के पीछे, थाना कोतवाली दमोह को दोषसिद्ध पाते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन -2018) की धारा धारा 13(1)बी सहपठित धारा 13(2)में दोषसिद्ध करते हुए 4 वर्ष का सश्रम कारावास व 1000 रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।
11 दिसंबर 19 को आवेदक उत्तम पटेल पिता बाबूलाल पटेल, निवासी बडगुवा
थाना नोहटा तह जबेरा जिला दमोह ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त सागर से शिकायत
किया था कि वह खेती बाडी का कार्य करता हूँ, अपने खेत पर मकान निर्माण के
लिये फर्सियां खरीदी थी, जो फर्सीयों को अपने निवास स्थान से अपने
ट्रेक्टर कमांक एम.पी. 34 ए 2845 पर लोड करवाकर अपने ट्रेक्टर को लेबर शंकर
पिता खूबचन्द्र पटेल के यहाँ रख दिया था और शाम को अपने निवास स्थान वापिस
आ गया था, इसके बाद दूसरे दिन उसका ट्रेक्टर लेबर शंकर पटेल के पास खड़ा
नही होने से इसकी रिपोर्ट लिखाने थाना नोहटा गया, तो थाना के कर्मचारियो ने
उसका ट्रेक्टर वन विभाग के पास होना बताया था, तो वह वन विभाग के सगौनी
बीट पर गया, तो वहां पर वन विभाग के साहब नहीं मिले।
इसके बाद उसे वन विभाग
से ट्रेक्टर जप्ती के संबंध में नोटिस प्राप्त हुआ, तो वह दिनांक 25
नम्बवर 19 को वन विभाग कार्यालय गया तो वन विभाग के अधिकारी नहीं मिलने से
वह पुनः वापिस आ गया था. इसके बाद वह दिनांक 10 दिसंबर 19 को फिर से वन
विभाग के अधिकारी वनपाल राधेश्याम श्रीवास्तव से मिला तो उन्होने मुझे बोला
कि तुम 10,000 रूपये की व्यवस्था कर लो तुम्हारा ट्रेक्टर छूट जायेगा.
आवेदक, आरोपी को रिश्वत देना नहीं चाहता था, बल्कि उसे रंगे हाथों
पकड़वाना चाहता था.आवेदक द्वारा की गई शिकायत की तस्दीक पश्चात ट्रेप का
आयोजन किया गया, आवेदक द्वारा अनावेदक से संपर्क कर रिश्वत मांग संबंधी
बातचीत को रिकार्ड किया गया.मांगवार्ता के दौरान अनावेदक आवेदक से 10,000
रूपये लेने को सहमत हो गया तथा आवेदक द्वारा 10000 की राशि की व्यवस्था न
होने से रिश्वत के रूप में 7000 रूपये लोकायुक्त कार्यालय लेकर पहुंचा।
ट्रेप के दौरान आरोपी राधेश्याम श्रीवास्तव से उक्त रिश्वत राशि 7000
रूपया बरामद की गई. विवेचना में संकलित भौतिक, मौखिक व इलेक्ट्रानिक
अभिलेखीय साक्ष्य के आधार पर आरोपी के विरूद्ध अभियोग पत्र माननीय न्यायालय
पेश किया गया। मामले में
दस्तावेजी साक्ष्य व मौखिक साक्ष्य व अभियोजन द्वारा प्रस्तुत तर्को से
सहमत होकर माननीय न्यायालय द्वारा दिनाँक 28 फरवरी 2025 को पारित निर्णय
में आरोपी को दण्डित किया गया.अभियोजन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक
अनंत सिंह ठाकुर द्वारा प्रभारी जिला अभियोजन अधिकारी कैलाश चंद पटेल के
मार्गदर्शन में की गई तथा प्रकरण में विवेचना उपुअ राजेश खेड़े द्वारा की
गई व विनय नामदेव द्वारा आवश्यक सहयोग किया गया।
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